खुद का दीदार करती हो

हमसे न चांद सा चहरा , छुपाया करो
खुद का दीदार करती हो 
मुझे भी कराया करो
और ये जो जुल्फे है तुम्हारी , काली घटा जैसी
इन्हे समेटा न करो , खुला ही रखा करो।
                                              

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